भिण्ड जिले के गांवों के लिए 2 अक्टूबर की ग्राम सभा सिर्फ एक और बैठक नहीं होगी। उस दिन विशेष ग्राम सभाओं में ‘जल अर्पण कार्यक्रम’ रखा जाएगा और पूरी हो चुकी नल जल योजनाओं की चाबी, यानी उनका जिम्मा, ग्राम पंचायतों को सौंपा जाएगा। कलेक्टर ने जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक में तय किया है कि इस कार्यक्रम के लिए कम से कम 100 पूर्ण नल जल योजनाएं तैयार रखी जाएं।
यह अभी तैयारी का चरण है, हस्तांतरण की तारीख 2 अक्टूबर तय की गई है। बैठक कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई, जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा हस्तांतरण के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर चर्चा की गई।
पहले परीक्षण, फिर हस्तांतरण
कलेक्टर ने सहायक यंत्री (एई) और जनपद सीईओ को निर्देश दिए कि प्रस्तावित योजनाओं का आगामी पांच दिनों में संयुक्त भ्रमण किया जाए और हर योजना में कमी या शेष कार्य का परीक्षण हो। जहां छोटे-मोटे मरम्मत कार्य बाकी हैं, उन्हें कार्यक्रम से पहले शीघ्र पूरा कराने को कहा गया है। मकसद यह है कि पंचायत को अधूरी नहीं, चालू हालत की योजना मिले।
जांच की जवाबदेही भी तय की गई है। कलेक्टर के निर्देश के अनुसार, यदि संयुक्त भ्रमण में कोई योजना हस्तांतरण के लिए उपयुक्त नहीं पाई जाती, तो उसे प्रस्तावित करने वाले एई के विरुद्ध विभागीय जांच कराई जाएगी।
सौंपने के बाद योजना चले, यह भी शर्त
बैठक में साफ किया गया कि हस्तांतरित योजनाओं को हर स्थिति में चालू रखा जाए। इसके लिए लाभान्वित परिवारों से निर्धारित शुल्क की नियमित वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली विभाग (एमपीईबी) को भुगतान लगातार होता रहे। यानी गांव में नल से पानी आता रहे, इसका आर्थिक पहिया भी पंचायत स्तर पर घूमता रहना है।
पुराने बकाया पर भी निर्देश हुआ। जनपद सीईओ से कहा गया है कि हस्तांतरित योजनाओं से जुड़े एमपीईबी के लंबित देयकों का भुगतान टाइड फंड से तत्काल कराया जाए।
अधूरी योजनाएं और टूटी सड़कें
कलेक्टर ने 49 से 25 प्रतिशत भौतिक प्रगति वाली नल जल योजनाओं की विस्तृत समीक्षा भी की। उन्होंने ऐसी सभी योजनाओं की अलग सूची बनाने को कहा, जिनमें भूमि संबंधी विवाद के कारण काम रुका हुआ है। सूची बनने के बाद ही इन अटकी योजनाओं पर आगे की राह तय हो सकेगी।
पाइपलाइन बिछाने के दौरान ठेकेदारों द्वारा तोड़ी गई सीसी रोड को लेकर भी निर्देश दिए गए। कहा गया कि सड़कें समय से ठीक नहीं की गईं तो संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध कानूनी और दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत, जनपद सीईओ तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और जल संसाधन विभाग के यंत्री मौजूद रहे। गांव के लोग 2 अक्टूबर को अपनी विशेष ग्राम सभा में जाकर देख सकते हैं कि उनके गांव की नल जल योजना हस्तांतरण सूची में है या नहीं, और सौंपे जाने के बाद उसका संचालन-शुल्क किस तरह तय होता है।




