जनजाति बाहुल्य जिले में एक ऐसे संवेदनशील पहलू को स्पर्श कर उसे समाज में समरस बना देना कोई आशा ग्राम ट्रस्ट से सीख सकता है। यह बात भारत सरकार के केंद्रीय दल में सदस्य इंस्टिट्यूट ऑफ़ हाइजीन और पब्लिक हेल्थ कोलकाता के डॉ बॉबी पॉल ने आशाग्राम ट्रस्ट का अवलोकन करते हुए कही।

उन्होंने आशा ग्राम ट्रस्ट के प्रकल्प देखें तथा उसकी संचालन व्यवस्था के विषय में जाना तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के योगदान के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी एवं कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के विषय में भी संस्था की स्थिति को समझा।

श्रीमती पॉल ने कहा किसी भी अच्छे कार्य के लिए संस्थान को संचालित करने के लिए अनेक व्यवधान आते हैं क्योंकि समाज में नकारात्मक एवं सकारात्मक दोनों ही विचारधाराए मौजूद है ऐसे में आपको निरंतर कार्य करते हुए अपने समाज हित के कार्यों को जारी रखना आपका ध्येय होना चाहिए।

डॉ पॉल ने कहा कुष्ठ रोगियों के समग्र पुनर्वास के साथ-साथ दिव्यांगजनों एवं मनोरोगियों के लिए भी यहां प्रकल्प संचालित होना बहुत प्रसन्नता की बात है। ऐसे संस्थानों को आगे बढ़कर जन सहयोग के साथ-साथ शासन प्रशासन एवं व्यवसायिक संस्थाओंका सहयोग मिलना चाहिए। सीमित संसाधनों में भी आपका उत्कृष्ट प्रदर्शन है।

इस दौरान केंद्रीय दल के सदस्य एवं जीएलआरए के राज्य कुष्ठ सलाहकार डॉ विशाल देसाई के द्वारा भी संस्था में वंचित वर्ग विशेष कर कुष्ठ रोगियों के हितार्थ किए गए कार्यों के विषय में चर्चा की। इस दौरान आशा ग्राम ट्रस्ट के सचिव डॉ चक्रेश पहाड़िया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष डॉ मदन सिंह सोलंकी, श्री सचिन दुबे श्री विपुल चतुर्वेदी श्री मनीष पाटीदार श्री मणिराम नायडू आदि उपस्थित रहे।