गांव में जब कटहल के पेड़ों पर फल अधिक आते हैं तो कई बार यह किसानों के लिए खुशी के साथ चिंता भी लेकर आता है। बाजार न मिलने से बड़ी मात्रा में कटहल खराब हो जाता है और मेहनत से तैयार उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। अब मझौली विकासखंड के ग्राम सेमरिहा की दीदियां इसी कटहल को आमदनी का जरिया बनाने की तैयारी में हैं। केरल से कटहल प्रसंस्करण का विशेष प्रशिक्षण लेकर लौटीं घमसान उत्पादक समूह की पांच दीदियां अब गांव में कटहल से चिप्स, जैम, आटा, पापड़, कुकीज सहित कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करेंगी।
कटहल प्रसंस्करण केंद्र, सेमरिहा से जुड़ी समूह की पांच दीदियों ने 24 से 27 सितंबर 2026 तक कृषि विज्ञान केंद्र, मैत्री निकेतन, तिरुवनंतपुरम, केरल में चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ लाइवलीहुड रिसर्च एंड ट्रेनिंग (ILRT) एवं मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला पंचायत सीधी द्वारा संचालित ‘रिस्टोर फॉर हरित भारत परियोजना’ के अंतर्गत किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों डॉ. देविका, डॉ. मंजू एवं डॉ. रघुराम दास ने महिलाओं को कटहल के प्रसंस्करण, संरक्षण एवं मूल्यवर्धन की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
चार दिवसीय प्रशिक्षण में दीदियों ने कटहल से चिप्स, पल्प, जैम, आटा, जूस, पापड़, कुकीज और विभिन्न बेकरी उत्पाद तैयार करने की तकनीक सीखी। खास बात यह रही कि प्रशिक्षण में कटहल के अपशिष्ट का भी उपयोग सिखाया गया। बचे हुए वेस्टेज से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण देकर अपशिष्ट को भी उपयोगी संसाधन में बदलने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में मौसम सिंह, सरोज यादव, इन्द्रकली बैगा, रेनू सिंह एवं शांति बैगा ने सहभागिता की। परियोजना की ओर से सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट स्वामी शरण कुशवाहा एवं रिसर्च एसोसिएट दीपांशी शर्मा भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल रहे।
केरल से लौटने के बाद समूह की दीदियां प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को गांव में धरातल पर उतारने की तैयारी कर रही हैं। कटहल प्रसंस्करण केंद्र के माध्यम से स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही समूह की दीदियां अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर इस गतिविधि से जोड़ेंगी। इस पहल से कटहल उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। वहीं स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों से उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने का अवसर भी मिलेगा।
उपज से उत्पाद और उत्पाद से बढ़ेगी आमदनी
सेमरिहा की यह पहल केवल कटहल के प्रसंस्करण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, महिला उद्यमिता और स्वरोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जिस उपज को अधिक उत्पादन के समय ग्रामीण अक्सर परेशानी और नुकसान का कारण मानते थे, वही अब प्रसंस्करण के जरिए अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है।
समूह की दीदियां स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर इस गतिविधि से जोड़ने की दिशा में काम करेंगी। इससे गांव में महिला समूह आधारित उद्यम को बढ़ावा मिलने के साथ ‘लखपति दीदी’ के लक्ष्य की दिशा में भी यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

