खेती और मजदूरी पर निर्भर रहने वाले डोंगरगांव आदिवासी समिति के 29 सदस्य आज मत्स्य पालन के माध्यम से सामूहिक आर्थिक गतिविधि से जुड़े हैं। 77 हेक्टेयर जलक्षेत्र के डोंगरगांव सिंचाई जलाशय को शासन से वर्ष 2025 में 10 वर्ष के लिए मत्स्यपालन के लिए पट्टे में प्राप्त कर स्थानीय रोजगार, आय वृद्धि और सहकारिता की भावना को बढ़ावा दे रहा है।

समिति द्वारा डोंगरगांव सिंचाई जलाशय में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए रोहू, कतला एवं मृगल जैसी भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियों का पालन किया जा रहा है। मत्स्य विभाग द्वारा शासकीय दर पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जाता है।

समिति द्वारा लगभग 50 लाख स्पॉन नर्सरी में संचयन कर उचित देखभाल एवं पालन के माध्यम से फिंगरलिंग आकार तक विकसित किया जाता है। इसके पश्चात फिंगरलिंग जलाशय में संचयन किए जाते हैं, जिससे जलाशय की मत्स्य उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जा सके। समिति द्वारा लगभग 3 मीट्रिक टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है।

मत्स्य विभाग की योजनाओं से जुड़कर समिति के सदस्य अपनी आजीविका को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बना रहे हैं। समिति को बचत सह राहत योजना का लाभ प्राप्त हो रहा है, जिससे सदस्यों को मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता एवं बचत की सुविधा मिलती है।

सामूहिक मत्स्य पालन के परिणामस्वरूप समिति को प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रूपये का लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे सदस्यों की आय में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।

आदिवासी गोंडवाना मछुआ सहकारी समिति, डोंगरगांव की सफलता यह दर्शाती है कि सामूहिक संगठन, जलाशय आधारित मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज संचयन तथा शासकीय योजनाओं का समन्वित लाभ ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ बना सकता है।

समिति की यह यात्रा सामूहिक परिश्रम, विभागीय सहयोग और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की प्रेरणादायक मिसाल है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विभागीय पहल

सेवा संकल्प अभियान के दौरान सहायक संचालक मत्स्योद्योग श्री राजा राज तिलक धुर्वे द्वारा समिति की बैठक आयोजित कर सदस्यों से संवाद किया गया। बैठक में मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं योजनाबद्ध बनाने के उद्देश्य से विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।