भारत सरकार की डेवलपमेंट कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन डिसेमिनेशन (DCID) योजना के अंतर्गत, जयपुर द्वारा आयोजित आंध्र प्रदेश के विशेष मीडिया दौरे के तहत राजस्थान से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज एचपीसीएल विशाख रिफाइनरी का दौरा किया।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की विशाख रिफाइनरी आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित भारत की प्रमुख तटीय रिफाइनरियों में से एक है। यह भारत के पूर्वी तट पर स्थापित होने वाली पहली तेल रिफाइनरी है। वर्ष 1957 में कैल्टेक्स ऑयल रिफाइनिंग इंडिया लिमिटेड द्वारा 0.675 MMTPA की प्रारंभिक क्षमता के साथ शुरू की गई इस रिफाइनरी ने विभिन्न चरणों में विस्तार एवं आधुनिकीकरण के साथ अपनी वर्तमान 15 MMTPA की क्षमता हासिल की है।
आधुनिकीकरण के साथ नई क्षमता
विशाख रिफाइनरी मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट (VRMP) के तहत रिफाइनरी का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कच्चे तेल प्रसंस्करण क्षमता 8.3 MMTPA से बढ़कर 15 MMTPA हो गई। इस परियोजना ने विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल के प्रसंस्करण तथा उच्च मूल्य वाले पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन की रिफाइनरी की क्षमता को भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है।
परिचालन उत्कृष्टता का नया कीर्तिमान
वित्त वर्ष 2025-26 में विशाख रिफाइनरी ने 16.04 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कच्चा तेल प्रसंस्करण दर्ज किया। यह रिफाइनरी की बढ़ी हुई प्रसंस्करण क्षमता और परिचालन दक्षता को दर्शाता है।
रिफाइनरी में मोटर स्पिरिट (MS), high स्पीड डीजल (HSD), एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), एलपीजी, सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO), लाइट डीजल ऑयल (LDO), बिटुमेन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। ये उत्पाद देशभर में उपभोक्ताओं और विभिन्न उद्योगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान देते हैं।
वैश्विक तकनीकी उपलब्धि — रेजिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी
आधुनिकीकरण के बाद विशाख रिफाइनरी की प्रमुख विशेषताओं में से एक रेजिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी (RUF) है, जिसे दिसंबर 2025 में कमीशन किया गया। 3.55 MMTPA की क्षमता वाली RUF में LC-MAX तकनीक का उपयोग किया गया है। यह डीप-कन्वर्जन रिफाइनिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। इस सुविधा में विश्व की पहली LC-MAX यूनिट शामिल है, जो बॉटम ऑयल्स के लगभग 93% तक को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित करने में सक्षम है।
यह भारत की पहली रेजिड्यू हाइड्रोक्रैकिंग यूनिट भी है, जिसमें हाइड्रोजन-आधारित तकनीक के माध्यम से भारी अवशेषों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है। RUF के माध्यम से रिफाइनरी की कॉम्प्लेक्सिटी में वृद्धि हुई है, डिस्टिलेट यील्ड में सुधार हुआ है तथा भारी और अवसर आधारित कच्चे तेल के प्रसंस्करण में अधिक लचीलापन प्राप्त हुआ है। रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स अब 11.6 है, जो इसकी उन्नत डीप-कन्वर्जन क्षमता को दर्शाता है।
प्रौद्योगिकी, नवाचार और आत्मनिर्भरता
विशाख रिफाइनरी एचपीसीएल के अनुसंधान एवं विकास तंत्र द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायिक स्तर पर उपयोग के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। एचपी ग्रीन आरएंडडी सेंटर द्वारा विकसित हाइड्रोजन प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन (HP-PSA) तकनीक का विशाख रिफाइनरी में वाणिज्यिक स्तर पर सफल प्रदर्शन किया गया है।
रिफाइनरी अपने परिचालनों में डिजिटल तकनीकों को भी तेजी से एकीकृत कर रही है। RUF में रियल-टाइम मॉनिटरिंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और AI-आधारित ऑप्टिमाइजेशन से युक्त एक समर्पित डिजिटल सुइट स्थापित किया गया है, जो परिचालनों को स्थिर, सुरक्षित और अधिक दक्ष बनाने में सहयोग करता है।
भारत के ऊर्जा संक्रमण में योगदान
पारंपरिक रिफाइनिंग परिचालनों के साथ-साथ विशाख रिफाइनरी एचपीसीएल की ऊर्जा संक्रमण पहलों का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरी है। एचपीसीएल ने विशाख रिफाइनरी में 370 TPA क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट कमीशन किया है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, रिफाइनरी में 1.5 MWp क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी कमीशन की गई है, जिससे रिफाइनरी के नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो को और मजबूती मिली है।
रिफाइनरी में पर्यावरणीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए वेट एयर ऑक्सीडेशन (WAO) यूनिट जैसी पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को भी अपनाया गया है। यह यूनिट स्पेंट कॉस्टिक स्ट्रीम के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
एक रिफाइनरी से कहीं अधिक
रणनीतिक तटीय स्थिति, आधुनिक बुनियादी ढांचे, उन्नत प्रसंस्करण क्षमताओं और मजबूत बाजार कनेक्टिविटी के साथ एचपीसीएल की विशाख रिफाइनरी भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेष रूप से देश के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में।
वर्ष 1957 में 0.675 MMTPA की क्षमता वाली रिफाइनरी के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने से लेकर आज 15 MMTPA क्षमता वाली आधुनिक डीप-कन्वर्जन रिफाइनरी बनने तक, विशाख रिफाइनरी एचपीसीएल की तकनीकी परिवर्तन, परिचालन उत्कृष्टता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की यात्रा को दर्शाता है।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में:
1957 – कमीशन; भारत के पूर्वी तट पर पहली तेल रिफाइनरी
15 MMTPA – वर्तमान कच्चे तेल प्रसंस्करण क्षमता
16.04 MMT – वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कच्चा तेल प्रसंस्करण
3.55 MMTPA – रेजिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी (RUF) की क्षमता
93% – LC-MAX तकनीक के माध्यम से बॉटम ऑयल्स का रूपांतरण
11.6 – नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स
370 TPA – ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता
1.5 MWp – विशाख रिफाइनरी में कमीशन की गई फ्लोटिंग सोलर परियोजना
BS-VI अनुरूप – रिफाइनरी में उत्पादित परिवहन ईंधन




